Publish date : 15-01-2009
पटना : शिक्षक नियुङ्घित की काउंसेलिंग शु होते ही लाखों आंखों में पल रहे सपनों के रंग सुर्ख हो गये हैं. जिनके नाम विभिन्न नियोजन इकाइयों की मेधा सूचियों की ऊपरी पांत में हैं, वे अपने सपनों को पालने-पोसने के लिए उपयुङ्घत शहर चुनने में व्यस्त हैं जबकि प्रतीक्षा सूची में जगह पानेवालों के सपनों की तामीर इस अनुमान पर निर्भर हैं कि ऊपरी पांतवाले किन शहरों को नापसंद करते हैं. मेधा सूची में ऊपर जगह पानेवालों के लिए नौकरी का शहर चुनने का पैमाना मुख्यत बिजली, अस्पताल, सड़क व बेहतर माहौल है. इसके अलावा ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो अपने पैतृक स्थल के नजदीकी पड़नेवाले शहर को पसंद कर रहे हैं. इन कारणों ने पटना, मुजफ्फरपुर, गया, औरंगाबाद, भागलपुर व दरभंगा की मेधा सूचियों में उाल ला दिया है. ये शहर शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष पद के उन उम्मीदवारों के पसंदीदा बन गये हैं, जिनको ऊंचे प्राप्तांक के कारण चुनने की सुविधा मिल गयी है. प्रतीक्षा सूची के उम्मीदवार बिहारशरीफ, आरा, बङ्घसर, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, मधेपुरा, सहरसा, मधुबनी, सुपौल ओद की ओर आशा भरी नजरों से देख रहे हैं. बहाली की विकेंद्रित प्रक्रिया के कारण अधिकतर उम्मीदवारों ने कई-कई जिलों में आवेदन किया था. इसलिए अधिकतर मेधा सूचियों के नाम समान हैं. इनमें से जिनके प्राप्तांक ज्यादा हैं, वे स्वाभाविक प से सभी जगह की मेधा सूची में ऊपर हैं. काउंसेलिंग के समय मूल प्रमाण पत्र नहीं रखे जाने के नियम के कारण ऐसे माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष पद के उम्मीदवारों को सुविधा हो गयी है कि वे नगर निगम की काउंसेलिंग (10 जनवरी) के बाद नगर पर्षद (13 जनवरी), नगर पंचायत (15 जनवरी) व जिला पर्षद (17 जनवरी) की काउंसेलिंग में भी भाग लें. ऐसे में एक ओर जहां मेधावी उम्मीदवारों के लिए नौकरी की जगह चुनने के लिए अधिक विकल्प हो गये हैं वहीं बड़ी संख्या में पदों के खाली रह जाने की भी उम्मीद है
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